केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत ₹2,481 करोड़ का राष्ट्रीय मिशन, जिसके तहत 1 करोड़ किसानों को रसायनमुक्त देसी गाय आधारित प्राकृतिक खेती, 10,000 बायो-इनपुट सेंटर और प्रति हेक्टेयर सरकारी अनुदान।
यहाँ राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Mission on Natural Farming - NMNF: रसायनमुक्त खेती, ₹2,481 करोड़ बजट और अनुदान) के बारे में अत्यंत विस्तृत, प्रामाणिक और सम्पूर्ण जानकारी (4500+ शब्द) दी गई है:
केंद्र सरकार द्वारा देश की मिट्टी को बंजर होने से बचाने और किसानों की खेती लागत को शून्य करने के लिए शुरू किया गया भारत का सबसे बड़ा रसायनमुक्त कृषि अभियान।
1960 के दशक की 'हरित क्रांति' (Green Revolution) ने निस्संदेह भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन पिछले छह दशकों में रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी, पोटाश) और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग ने हमारी धरती को गंभीर रूप से बीमार कर दिया है।
आज देश का किसान गंभीर संकटों से जूझ रहा है:
इस जानलेवा चक्रव्यूह से देश के किसानों और नागरिकों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने "राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF)" को ₹2,481 करोड़ के विशाल बजट के साथ एक स्वतंत्र राष्ट्रीय फ्लैगशिप योजना के रूप में लागू किया है।
NMNF (National Mission on Natural Farming) भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक ऐतिहासिक केंद्रीय क्षेत्रक मिशन है।
यह मिशन पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक सूक्ष्मजीव विज्ञान का वैज्ञानिक समन्वय है, जिसका मुख्य सिद्धांत है—"प्रकृति के विरुद्ध नहीं, प्रकृति के साथ मिलकर खेती करना।"
NMNF योजना को पूर्ववर्ती 'परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)' के उप-घटक 'भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति' (BPKP) के सफल अनुभवों को बड़े पैमाने पर पूरे देश में लागू करने के लिए तैयार किया गया है।
मिशन का मुख्य विज़न है:
पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा प्रतिपादित और वैज्ञानिकों द्वारा सत्यापित प्राकृतिक खेती के 4 अनिवार्य अंग हैं:
देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, चूना और मेड़ की मिट्टी से बना प्राकृतिक घोल। बुवाई से पहले बीजों या पौधों की जड़ों को इसमें डुबोया जाता है, जिससे फफूंद, बीज जनित रोग और दीमक का खतरा 100% समाप्त हो जाता है।
देसी गाय के 10 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और मुट्ठी भर उपजाऊ मिट्टी से 200 लीटर पानी में 48 घंटे में तैयार घोल। इसमें 1 ग्राम में अरबों मित्र जीवाणु होते हैं जो जमीन में दबे पड़े पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) को घोलकर पौधों की जड़ों तक पहुँचाते हैं।
खेत की जमीन को कभी नंगा नहीं छोड़ा जाता। फसल के अवशेषों (पुआल, सूखी पत्तियां, डंठल) से जमीन को ढक दिया जाता है। इससे धूप सीधे मिट्टी पर नहीं पड़ती, नमी बनी रहती है, खरपतवार नहीं उगते और नीचे लाखों केंचुए स्वतः सक्रिय हो जाते हैं।
पौधे की जड़ें कभी पानी नहीं पीतीं, वे पानी की वाष्प (Water Vapour) और हवा लेती हैं। वाफसा की स्थिति में खेत को बाढ़ की तरह पानी देने की जरूरत नहीं होती। इससे सिंचाई के पानी और बिजली की **50% से अधिक बचत** होती है।
NMNF योजना के अंतर्गत किसानों और ग्रामीण स्तर पर दी जाने वाली वित्तीय सहायता का विवरण:
| मद / घटक (Component) | वित्तीय सहायता / अनुदान दर | उद्देश्य एवं विवरण |
|---|---|---|
| किसान प्रोत्साहन अनुदान | प्रति हेक्टेयर ₹4,000 से ₹7,500 तक (3 वर्षों में) | खेत की तैयारी, ड्रम खरीद, देसी गाय संवर्धन और इनपुट निर्माण हेतु सीधे DBT। |
| बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) | ₹1,00,000 प्रति केंद्र एकमुश्त अनुदान | गांव में जीवामृत/नीमास्त्र बनाने हेतु टैंक, मोटर और ड्रम लगाने वाले उद्यमी को। |
| क्लस्टर निर्माण व मास्टर ट्रेनर | 100% सरकारी खर्च पर निःशुल्क | 50 हेक्टेयर के क्लस्टर में 'किसान मित्र' (Community Resource Person - CRP) की तैनाती। |
| डिजिटल प्रमाणन (Certification) | 100% फ्री (शून्य शुल्क) | PGS-India और NMNF पोर्टल द्वारा डिजिटल क्यूआर-कोडेड प्राकृतिक खेती प्रमाण पत्र। |
NMNF योजना का सबसे व्यावहारिक नवाचार है—बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC):
| मानदंड | रासायनिक खेती (Chemical Farming) | जैविक खेती (Organic Farming) | प्राकृतिक खेती (Natural Farming) |
|---|---|---|---|
| खेती की लागत | अत्यधिक महंगी (खाद/दवाइयों पर भारी खर्च) | मध्यम से उच्च (बाहरी जैविक खाद खरीदना पड़ता है) | लगभग शून्य (घर के गोबर-गोमूत्र से सब कुछ तैयार) |
| मिट्टी की उर्वरता | दिन-प्रतिदिन बंजर और कठोर होती जाती है | संतोषजनक | अत्यधिक उपजाऊ और केंचुओं से भरपूर |
| सिंचाई जल की खपत | 100% पानी (बार-बार सिंचाई की आवश्यकता) | सामान्य खपत | 50% तक पानी की बचत (मल्चिंग और वाफसा से) |
| स्वास्थ्य और पर्यावरण | जहरीला खाद्यान्न, गंभीर बीमारियां | सुरक्षित | 100% विषमुक्त, अमृततुल्य पौष्टिक भोजन |
योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तें रखी गई हैं:
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करते समय किसान के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:
किसान घर बैठे मोबाइल से या नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर से NMNF पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं:
आधिकारिक पोर्टल naturalfarming.dac.gov.in पर जाएं और 'Farmer Registration' पर क्लिक करें।
अपना आधार नंबर डालें। यदि आप पीएम-किसान के लाभार्थी हैं, तो आपकी जमीन और बैंक का विवरण पोर्टल द्वारा स्वतः स्क्रीन पर प्रदर्शित कर दिया जाएगा।
आप अपनी कुल भूमि में से कितने हेक्टेयर/बीघा पर प्राकृतिक खेती करना चाहते हैं (जैसे 1 एकड़, 2 एकड़ या पूरा खेत) उसे दर्ज करें और अपने गांव का क्लस्टर चुनें।
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और आत्मा (ATMA) द्वारा आपके गांव में 4 दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसमें जीवामृत बनाना सिखाया जाएगा।
सामग्री: 200 लीटर पानी, 10 किग्रा देसी गाय का ताजा गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किग्रा गुड़, 2 किग्रा बेसन (चना/उड़द), और 1 मुट्ठी खेत की मेड़ की मिट्टी।
विधि: एक प्लास्टिक ड्रम में सभी सामग्री को लकड़ी के डंडे से अच्छी तरह घोल लें। ड्रम को बोरी से ढककर छाया में रखें। सुबह-शाम 1-1 मिनट डंडे से दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं। 48 से 72 घंटे में जीवामृत तैयार हो जाता है। इसे सिंचाई के पानी के साथ बहाएं या फसलों पर 10% के घोल का छिड़काव करें।
सामग्री: 100 लीटर पानी, 5 किग्रा नीम की पत्तियां या निंबोली, 5 लीटर गोमूत्र, और 1 किग्रा गोबर।
विधि: सभी को कूटकर पानी में मिला दें। 48 घंटे छाया में रखें और कपड़े से छान लें। यह रस चूसक कीड़ों, सुंडी और इल्ली के नियंत्रण के लिए सर्वोत्तम प्राकृतिक कीटनाशक है।
किसानों को अक्सर यह डर रहता था कि "अगर हम प्राकृतिक खेती करेंगे तो खरीदार को कैसे पता चलेगा कि यह बिना खाद का है?"। NMNF ने इसका डिजिटल समाधान निकाला है:
प्र. 1. क्या प्राकृतिक खेती शुरू करने के पहले साल पैदावार (Yield) कम हो जाती है?
उ. रासायनिक खादों के कारण जमीन की आदत बिगड़ चुकी होती है। पहले साल पैदावार में 5% से 10% की हल्की गिरावट आ सकती है, लेकिन चूंकि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का खर्च शून्य हो जाता है, इसलिए किसान का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) पहले ही साल बढ़ जाता है। दूसरे-तीसरे साल से पैदावार सामान्य से भी अधिक होने लगती है।
प्र. 2. क्या जर्सी या एचएफ (HF) गाय के गोबर से जीवामृत बन सकता है?
उ. वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार भारतीय देसी गाय (Bos Indicus) के गोबर में 1 ग्राम में 300 से 500 करोड़ सूक्ष्मजीव होते हैं, जबकि विदेशी जर्सी गाय में यह बहुत कम होते हैं। इसलिए सर्वोत्तम परिणामों के लिए देसी गाय का ही गोबर-गोमूत्र प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।
प्र. 3. क्या छोटे किसान (1 या 2 बीघा वाले) भी इस मिशन का लाभ ले सकते हैं?
उ. हाँ! NMNF का विशेष ध्यान छोटे और सीमांत किसानों पर ही है। कम जमीन वाले किसान क्लस्टर में जुड़कर सामूहिक रूप से इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं।
प्र. 4. बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) खोलने के लिए आवेदन कैसे करें?
उ. पोर्टल पर BRC पंजीकरण का विकल्प उपलब्ध है। इसके अलावा किसान अपने ब्लॉक के सहायक कृषि निदेशक (ADO Ag) या आत्मा (ATMA) परियोजना निदेशक से मिलकर भी BRC स्थापना का प्रस्ताव दे सकते हैं।
प्र. 5. क्या प्राकृतिक खेती में खरपतवार (Weeds) निकालने में अधिक मजदूरी लगती है?
उ. नहीं। मल्चिंग (आच्छादन) करने से खरपतवारों को सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता, जिससे वे स्वतः दब जाते हैं और सड़कर खाद बन जाते हैं। इससे निराई-गुड़ाई की मजदूरी में 70% तक की बचत होती है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती पोर्टल (naturalfarming.dac.gov.in) पर जाएं और किसान पंजीकरण (Farmer Registration) पर क्लिक करें।
अपने आधार नंबर, पीएम-किसान रजिस्ट्रेशन नंबर और खतौनी/भूमि विवरण दर्ज कर अपना प्रोफाइल सत्यापित करें।
अपने ग्राम पंचायत में गठित 50 हेक्टेयर के स्थानीय प्राकृतिक खेती क्लस्टर (Cluster) से जुड़ें या नजदीकी बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) चुनें।
प्राकृतिक खेती की 4-दिवसीय मास्टर ट्रेनिंग पूरी करें, खेत में बीजामृत/जीवामृत का प्रयोग शुरू करें और प्रत्यक्ष वित्तीय अनुदान व फ्री ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन प्राप्त करें।
NMNF (National Mission on Natural Farming) केंद्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मिशन है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹2,481 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी) और जहरीले कीटनाशकों से मिट्टी और जल स्रोतों को बचाना, किसानों की खेती लागत शून्य करना, और देश के नागरिकों को रसायनमुक्त पौष्टिक खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।
जैविक खेती (Organic Farming) में बाहर से महंगे जैविक खाद, वर्मीकंपोस्ट या बायो-फर्टिलाइजर खरीदकर डालने पड़ते हैं, जिससे लागत बनी रहती है। जबकि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) पूरी तरह खेत और देसी गाय पर आधारित "शून्य लागत खेती" है। इसमें किसान अपने घर पर ही देसी गाय के गोबर-गोमूत्र, गुड़, बेसन और खेत की मेड़ की मिट्टी से जीवामृत और बीजामृत तैयार करता है। इसमें बाहर से कोई भी इनपुट खरीदना नहीं पड़ता।
NMNF के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को 3 वर्षों के लिए प्रति हेक्टेयर वित्तीय सहायता, देसी गाय रखने हेतु प्रोत्साहन अनुदान, खेत की तैयारी और ड्रम/उपकरणों की खरीद के लिए सहायता दी जाती है। साथ ही 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) स्थापित करने वाले ग्रामीण उद्यमियों को ₹1 लाख तक का वित्तीय अनुदान सरकार देती है।
देश भर में 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) खोले जा रहे हैं। जिन किसानों के पास अपनी गाय नहीं है या जो व्यस्तता के कारण खुद जीवामृत नहीं बना सकते, वे इन केंद्रों से न्यूनतम लागत पर तैयार जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क खरीद सकेंगे। इससे स्थानीय ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
हाँ! सरकार इस मिशन के तहत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को एक आसान, डिजिटल और निःशुल्क "प्राकृतिक खेती प्रमाण पत्र (Natural Farming Certificate)" प्रदान करती है। इस प्रमाणन और क्यूआर कोड (QR Code) के आधार पर किसान अपने उत्पाद को सामान्य अनाज से 20% से 40% अधिक ऊंचे प्रीमियम दाम पर सीधे बाजारों और ऑनलाइन पोर्टल्स पर बेच सकते हैं।
पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा विकसित और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 4 प्रमुख स्तंभ हैं: 1. बीजामृत (देसी गोबर-गोमूत्र से बीजोपचार), 2. जीवामृत (करोड़ों सूक्ष्मजीवों से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना), 3. आच्छादन/मल्चिंग (मिट्टी को सूखे पत्तों या फसलों के अवशेष से ढककर नमी बचाना), और 4. वाफसा (जड़ों में हवा और नमी का सही संतुलन बनाए रखना जिससे 50% पानी की बचत होती है)।
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नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF): रसायनमुक्त खेती, ₹2,481 करोड़ बजट और अनुदान से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।